24. चलचित्र


सुन्दर सुसज्जित एक कक्ष।
एक युवती बैठकर सिलाई कर रही है। कोने मे दूध-सी सफेद एक बिल्ली। सिलाई करने मे दिल नहीं लगा। प्यानो बजाकर गाना गाने लगी। यह भी अच्छा नहीं लगा। अन्त में टेबल पर रखे एक गुल्दस्ते मे फूल सजाने बैठ गयी। साथ ही गुनगुना भी रही है। मैं मुग्ध हो गया। सोचने लगा- मेरे दिल की बात क्या कभी उस तक पहुँचेगी?
पता चला, अपने अनगिनत प्रेमियों में से दो को लेकर वह सम्प्रति विव्रत है। एक है रईसजादा, चॉकलेटी नौजवान। रोज तरह-तरह के उपहार लेकर आता है। मोटर मंे घुमाने ले जाता है। युवती के पिता को इसमें आपत्तिजनक कुछ नहीं दीखता। कारण, वे चाहते हैं कि यह चॉकलेटी लड़का ही उनका दामाद बने। उनकी स्वर्गीया पत्नी की भी यही इच्छा थी और मरते समय उनके किये इस अनुरोध की वजह से ही यह तन्वी रूपसी उस चॉकलेटी के साथ विवाह करने के लिए राजी हुई थी। मृत्युशैया पर पड़ी माँ की अन्तिम इच्छा का पालन भला कौन नहीं करना चाहता!
चॉकलेटी लड़का अच्छा ही है, पैसे वाला है, कुरुप भी नही है, स्वास्थ्य अच्छा ही है। लेकिन-! युवती ने हर तरफ से सोच कर देखा। लेकिनका मामला रह ही जाता है। उसदिन बेकाबू घोड़े के सामने आकर अपनी जान को खतरे मे डाल कर जिस सुन्दर युवक ने उसे बचाया था, यह चॉकलेटी उसके जैसा बिल्कुल नहीं है।
उस नामगोत्रहीन दुस्साहसी युवक को वह समस्त नारी हृदय से चाहने लगी है। चॉकलेटी लेकिन पीछे हटने वाला नहीं है।
युवती उसे भगा भी नहीं सकती। माँ की अन्तिम इच्छा है। माँ की मृत्युछायाच्छन्न शीर्ण चेहरे की याद आ जाती है। चॉकलेटी को कुछ कह भी नहीं सकती।
जबकि वह युवक! युवक का परिचय उसे मिल गया। वह एक जमीन्दार का साईस है। साईस है तो क्या, सुशिक्षित है। शेक्शपीयर से गॉल्सवर्दि, यहाँ तक की आर्लेन तक की खबर वह रखता है। विश्वविद्यालय का मेधावी छात्र है। देश का कर्णधार वह हो सकता था; सिर्फ किस्मत के दोष से वह आज एक साईस मात्र है। सर्वोपरि, वह सुन्दर एवं सुपुरुष है। बलिष्ठ, सतेज, विद्रोही। भले ही मामूली साईस है, मगर चेहरे पर हँसी की दमक है, आँखो में है प्यार की चमक!
मैंने तो हार मान ली।
वास्तव में, एक तरफ वह चॉकलेटी और दूसरी तरफ सर्वगुणसम्पन्न साईस नौजवान- इनके बीच मेरे-जैसे नगण्य आदमी की भला क्या बिसात? अपने एकमात्र सम्बल छँटी हुई मूँछों पर हाथ फेरते हुए मैं सोच में डूब गया।
ऐन मौके पर एक घटना घट गयी। अब तक युवती और साईस शहर के बाहर जो पुल है, वहाँ शाम को गुप्त रुप से दो-एक बार मिल चुके थे। एक दिन चुम्बन-विनिमय भी हुआ था। लेकिन उस दिन जो घटना घटी, वह सचमुच रोमांचक थी।
गहन रात्रि। साईस युवक एक विशाल घोड़े पर चढ़कर हाजिर। ब्राऊन रंग का विशालकाय घोड़ा। गर्दन टेढ़ी कर दौड़ता हुआ आया।
युवती के घर के बाहर एक सीटी बजाते ही युवती घर से निकलकर बाहर आ गयी। क्षणभर के लिए उसकी माँ का अन्तिम चेहरा उसके स्मृतिपटल पर तैर गया। मगर यह क्षणभर के लिए ही था। उसी समय साईस ने उसे घोड़े की पीठ पर बैठा लिया। इसके बाद-
खटमट- खटमट- खटमट-
घोड़े की टापों की आवाज के साथ ही मेरा भी रक्त मानो उबलने लगा।
थोड़ी देर के बाद चॉकलेटी को भी खबर लगी। जब वह सही में यह समझ गया कि उसकी प्रेयसी प्रणय-शृँखला को काटकर भाग गयी है, तब उसके चेहरे का भाव देखने लायक था। प्रताड़ित चॉकलेटी, उन्मत्त चॉकलेटी! उफ्फ, क्या चेहरा था! गाड़ी लेकर बाहर निकलते ही एक वृद्धा ने उसे बता दिया कि किस रास्ते से वे लोग गये हैं। प्रकाण्ड रॉल्स रॉयसउसी रास्ते पर दौड़ गयी। उद्भ्रान्त चॉकलेटी स्टीयरिंगपकड़कर बैठा है। तीस, चालीस, पचास- गाड़ी की रफ्तार बढ़ती जा रही है। सर के बाल हवा में लहरा रहे हैं।
क्या प्राणान्तक अनुधावन था यह! नक्षत्र वेग से घोड़ा मैदान, जंगल, पर्वतों से गुजरता जा रहा है; विद्युत वेग से चॉकलेटी अनुसरण कर रहा है। प्रायः पकड़ने ही वाला था कि ऐन मौके पर सामने एक नदी! एक छलाँग में अश्व नदी को पार कर गया। चॉकलेटी का रॉल्स-रॉयस नहीं सका। स्टीयरिंग छोड़कर आक्रोश में चॉकलेटी ने दोनों हाथों से अपने सर के बाल पकड़ लिये। 
छपाक!
चॉकलेटी पानी में कूद पड़ा है। लेकिन तैरना उसे नहीं आता। तेज धार वाली पहाड़ी नदी। भीषण बहाव। प्राणपण से चेष्टा करने लगा वह। वह आसानी से नहीं छोड़ेगा। नाक-मुँह से पानी पीते हुए डूबने-उतराने का अति हो गया। फिर भी नहीं छोड़ेगा वह। क्या ही अमानुषिक आप्राणचेष्टा थी! इसे ही कहते हैं प्यार! समस्त आत्मा, समस्त सत्ता देकर चॉकलेटी उस पार जाना चाहता है।
प्रियतमा जो उसपार आततायी के हाथों में कैद है!
चॉकलेटी से अब नहीं हो पा रहा है। होश खो रहा है। हाथ-पैर क्लान्त, अवसन्न हो रहे हैं। सर्वांग शिथिल हो आया। चॉकलेटी शायद डूब गया!
***
इसी समय उस पार एक पहाड़ी की चोटी पर खड़े होकर साईस युवक तथा युवती आकाश की ओर देख रहे हैं- बादलों को भेदकर चाँद उग रहा है।
अचानक साईस की नजर पड़ी, नीचे नदी में कोई डूब रहा है। संगिनी से बोला, ‘‘देखो, कोई डूब रहा है। उसे बचाता हूँ।’’
युवती बोली, ‘‘लेकिन वह चॉकलेटी है।’’
साईस कोई साधारण इन्सान नहीं है। महामानव है वह तो! हँसकर बोला, ‘‘यह मैं जानता हूँ; चॉकलेटी है तो क्या, है तो वह मनुष्य ही न! वह डूबेगा और मैं खड़ा देखता रहूँगा! ऐसा नहीं हो सकता।’’ घोड़े पर चढ़कर तीर के समान गति से वह नीचे उतर गया।
कुछ देर बाद देखा गया, चॉकलेटी के शरीर को कँधे पर रखकर साईस पहाड़ की चढ़ाई चढ़ रहा है। बेहोश, भारी-भरकम, भींगे हुए चॉकलेटी को लेकर पहाड़ पर चढ़ना! कितना कष्टकर था! साईस के चेहरे पर देवताओं की दीप्ति थी- शरीर में दैत्य का बल!
घोड़ा मंत्रमुग्ध-सा पीछे-पीछे चल रहा है।
इसके बाद दोनों ने मिलकर चॉकलेटी की क्या सेवा की! साईस अपने एकमात्र कम्बल में उसे लपेटकर खुद ठण्ड में पड़ा रहा।
युवती ने इसपर कहा, ‘‘प्रियतम, तुम साईस नहीं, तुम देवता हो।’’
कम्बल के अन्दर से चॉकलेटी ने कहा, ‘‘सही कह रही हो। लेकिन इस वक्त सो जाओ।’’
सोये-सोये युवती स्वप्न देख रही थी। उसकी माँ कह रही है- ‘‘बेटी, तुम योग्यतम से ही विवाह करो- यही मेरी पुनश्च इच्छा है।’’
नीन्द से जागकर युवती ने देखा, सामने एक वृक्ष की डाल पर एक जोड़ा कपोत-कपोती एक-दूसरे की चोंच से चोंच मिला रहे हैं। करवट बदलकर उसने देखा, चॉकलेटी जागकर बैठा हुआ है। चॉकलेटी ने आवेग के साथ कहा, ‘‘देखो, तुम इस साईस के ही उपयुक्त हो। मुझे सिर्फ नदी पार करवा दो। ईश्वर तुम दोनों को सुखी रखे।’’
युवती ने कहा, ‘‘धन्यवाद। आपको वे अवश्य ही नदी पार करा देंगे। उन्हें जगाईये।’’
चॉकलेटी ने देखा, थोड़ी ही दूरी पर साईस गहरी नीन्द में सो रहा है। पुकारा, कोई उत्तर नहीं। हिलाया, कोई उत्तर नहीं। साईस बुखार से बेहोश हो रहा था।
और कोई रास्ता न देख चॉकलेटी अकेले ही पहाड़ से उतरने लगा। कपड़े उस वक्त भी भींगे हुए थे, सारा शरीर कीचड़ से लथपथ था, चेहरे पर थी निराशा।
हताश प्रणयी चॉकलेटी का वह क्या ही करूण अवरोहण था!
फिल्म समाप्त हो गयी। रास्ते पर चलते-चलते सीने के अन्दर कैसी एक टीस-सी उभरने लगी। और क्या करता! अन्त में, अधजली बीड़ी को कान से निकालकर सुलगा लिया।

***

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